6 जुल 2026
सेल्स ऑर्डर और ATP: प्लानर “शुक्रवार” के वादे को कैसे जाँचता है
500 का ऑर्डर, हाथ में 200। आसान? पूरी तरह नहीं। स्टेप-दर-स्टेप देखिए कि प्लानर अवेलेबल-टू-प्रॉमिस (ATP), केपेबल-टू-प्रॉमिस (CTP) और आंशिक शिपमेंट का सवाल कैसे सुलझाता है।

सोमवार शाम 4 बजे सेल्स का फ़ोन आता है। एक ग्राहक को शुक्रवार तक 500 यूनिट चाहिए। स्टॉक स्क्रीन पर 200 दिख रही हैं। आसान है: 300 और बनाइए और भेज दीजिए? पूरी तरह नहीं। जब तक प्लानर ठीक से जाँच पूरी करता है, असली कमी 230 निकलती है, और उसका भी सिर्फ़ एक हिस्सा शुक्रवार तक बन सकता है।
सेल्स ऑर्डर किसी ग्राहक की पक्की प्रतिबद्धता है कि वह किसी प्रोडक्ट की एक मात्रा एक तारीख़ तक ख़रीदेगा। फ़ैक्टरी में यह एक सवाल भी है: क्या हम इसे डिलीवर कर सकते हैं, किस चीज़ से, और कब? हाँ कहने से पहले इस सवाल का जवाब देना ऑर्डर प्रॉमिसिंग कहलाता है, और यह दो जाँचों पर टिका है: ATP (अवेलेबल-टू-प्रॉमिस) और CTP (केपेबल-टू-प्रॉमिस)।
स्टेप 1: हाथ में होना, उपलब्ध होना नहीं है
शेल्फ़ पर रखी 200 यूनिट में से 80 पहले से किसी दूसरे ग्राहक के ऑर्डर के लिए अलॉट हैं, जो गुरुवार को शिप होना है। वे वहाँ मौजूद तो हैं, पर उन पर किसी और का हक़ है।
किसी रेस्टोरेंट के बारे में सोचिए। खिड़की वाली टेबल ख़ाली है, पर उस पर “रिज़र्व्ड” का कार्ड रखा है। सिर्फ़ इसलिए कि अभी वहाँ कोई बैठा नहीं, आप बिना बुकिंग आए लोगों को वहाँ नहीं बिठा सकते।
तो पहला आँकड़ा है 200 − 80 = आज 120 यूनिट फ़्री।
स्टेप 2: जो आने वाला है उसे जोड़िए, अगर उस पर किसी का दावा नहीं है
प्रोडक्शन में 150 यूनिट का एक ऑर्डर है जो बुधवार को पूरा होना है। उन्हें गिनने से पहले प्लानर एक बात जाँचता है: क्या ये 150 पहले से किसी और को वादा की जा चुकी हैं? यहाँ ऐसा नहीं है।
शुक्रवार तक उपलब्ध: 120 + 150 = 270। ग्राहक को 500 चाहिए। बिना कवर: 500 − 270 = 230 यूनिट।
यही है अवेलेबल-टू-प्रॉमिस (ATP): हाथ में मौजूद स्टॉक, घटा पहले से अलॉट हुआ, जोड़ वे शेड्यूल्ड रिसीट जिन पर अभी किसी का दावा नहीं है, अवधि-दर-अवधि गिना गया। ATP इस सवाल का जवाब देता है: “जो सप्लाई पहले से मौजूद है या पहले से प्लान है, उसमें से मैं क्या वादा कर सकता हूँ?”
स्टेप 3: केपेबल-टू-प्रॉमिस, क्या हम बाक़ी बना सकते हैं?
ATP मौजूदा सप्लाई पर रुक जाता है। 230 यूनिट के लिए नया प्रोडक्शन चाहिए, और यहीं आता है केपेबल-टू-प्रॉमिस (CTP)। CTP पूछता है कि क्या बची हुई मात्रा समय पर बनाने के लिए मटीरियल और कैपेसिटी दोनों मौजूद हैं।
प्लानर दो चीज़ें जाँचता है:
- मटीरियल। 230 यूनिट के BOM (बिल ऑफ़ मटीरियल्स) के लिए 460 ब्रैकेट चाहिए। स्टॉक में 600 हैं, जिनमें से 100 दूसरे ऑर्डरों के लिए अलॉट हैं। 500 फ़्री हैं, जो 460 को कवर करती हैं। ठीक है।
- कैपेसिटी। असेंबली सेल प्रति घंटे 40 यूनिट बनाता है। 230 यूनिट को 230 / 40 = 5.75 घंटे चाहिए। सेल गुरुवार तक पूरी तरह बुक है, और गुरुवार दोपहर बाद 4 घंटे ख़ाली हैं। 4 × 40 = 160 यूनिट।
नतीजा: शुक्रवार तक 160 यूनिट और तैयार हो सकती हैं। आख़िरी 230 − 160 = 70 यूनिट को 70 / 40 = 1.75 घंटे चाहिए, जो अगले सोमवार सुबह फ़िट हो जाते हैं। टेस्टिंग और पैकिंग के बाद वे मंगलवार को शिप होंगी।
स्टेप 4: आंशिक शिपमेंट या पूरा एक साथ?
अब प्लानर के पास अंदाज़े की जगह असली जवाब है:
- शुक्रवार: 120 + 150 + 160 = 430 यूनिट।
- मंगलवार: बाक़ी 70 यूनिट।
यह चलेगा या नहीं, यह ग्राहक पर निर्भर है। कुछ ग्राहक आंशिक शिपमेंट ख़ुशी से ले लेते हैं: 430 यूनिट से उनकी लाइन चलती रहती है। दूसरे शिप कम्प्लीट (पूरा माल एक साथ) पर अड़ते हैं, क्योंकि दो डिलीवरी का मतलब है दो रिसीट, दो इनवॉइस और ग़लती के दो मौक़े। तब ईमानदार वादा है: सभी 500 मंगलवार को।
ग्राहक से पूछिए; अंदाज़ा मत लगाइए। सबसे बुरा जवाब है 500 के लिए “शुक्रवार” का वादा करना और 430 भेजना। ऑर्डर लेवल पर यह फ़ेल डिलीवरी गिनी जाती है, और इसीलिए OTIF आंशिक सरप्राइज़ को इतनी कड़ी सज़ा देता है।
मिथक: “अगर स्टॉक में है, तो मैं वादा कर सकता हूँ”
वादा करने में यह सबसे आम ग़लती है, और यह दोनों दिशाओं में नाकाम होती है।
यह ज़्यादा वादा करवाती है, जब स्टॉक अलॉट हो चुका हो, क्वालिटी होल्ड पर हो, या ग़लत वेयरहाउस में पड़ा हो। स्क्रीन पर 200 था; सच 120 था।
यह कम वादा भी करवाती है। जो सेल्सपर्सन 200 देखता है और बुधवार की 150 या गुरुवार की ख़ाली कैपेसिटी के बारे में कुछ नहीं जानता, वह कह सकता है “अभी 200, बाक़ी तीन हफ़्ते में।” ग्राहक किसी प्रतियोगी के पास चला जाता है, और गुरुवार का स्लॉट बेकार जाता है।
इलाज: पहले अलॉटमेंट जाँचिए, फिर शेड्यूल्ड रिसीट, फिर कैपेसिटी। इसी क्रम में।
ATP बनाम CTP: सेल्स ऑर्डर का वादा
- ATP उस स्टॉक और सप्लाई का इस्तेमाल करता है जो पहले से मौजूद है या पहले से प्लान है। यह तेज़ और भरोसेमंद है, और ज़्यादातर मेक-टू-स्टॉक (MTS) आइटम के लिए काफ़ी है।
- CTP नए प्रोडक्शन के लिए मटीरियल और कैपेसिटी की जाँच जोड़ता है। यह धीमा है और अच्छी रूटिंग व कैलेंडर पर निर्भर है, पर मेक-टू-ऑर्डर (MTO) प्रोडक्टों के लिए यही एकमात्र ईमानदार जवाब है।
आपकी फ़ैक्टरी यह रेखा कहाँ खींचती है, यह एक रणनीतिक फ़ैसला है। मेक-टू-ऑर्डर बनाम मेक-टू-स्टॉक समझाता है कि कैसे तय करें कि किन प्रोडक्टों का वादा स्टॉक से होगा और किनका कैपेसिटी से। और अगर ऐसा अचानक आया ऑर्डर हर सोमवार आता रहता है, तो शायद वह अचानक था ही नहीं। डिमांड प्लानिंग दिखाती है कि इसे पहले से कैसे देखा जाए।
factory.online कैसे मदद करता है
factory.online में सेल्स ऑर्डर सीधे मैन्युफ़ैक्चरिंग डिमांड बनाता है। प्लानर को एक ही जगह पर 80 अलॉट हुई यूनिट, बुधवार वाला प्रोडक्शन ऑर्डर, BOM के मुक़ाबले ब्रैकेट का स्टॉक, और शेड्यूलिंग गैंट चार्ट पर गुरुवार के ख़ाली घंटे दिखते हैं। जब 230 अतिरिक्त यूनिट कन्फ़र्म होती हैं, तो वे एक मैन्युफ़ैक्चरिंग ऑर्डर और असेंबली सेल के लिए एक जॉब ऑर्डर बन जाती हैं, जो अब भी ग्राहक ऑर्डर से जुड़े रहते हैं, ताकि अगर गुरुवार का स्लॉट खिसके, तो साफ़ दिखे कि किसकी डिलीवरी ख़तरे में है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या ATP और फ़्री स्टॉक एक ही हैं? नहीं। फ़्री स्टॉक सिर्फ़ आज का है। ATP अवधि-दर-अवधि बिना दावे वाली रिसीट भी गिनता है।
क्या सेल्स को ATP सीधे दिखना चाहिए? हाँ, स्टॉक से वादा होने वाले आइटम के लिए। मेक-टू-ऑर्डर आइटम के लिए प्लानिंग की एक झटपट CTP जाँच ऐसे वादों से बचाती है जिन्हें प्लांट निभा न सके।
अगर आपके प्लानर हर बार सेल्स का फ़ोन आने पर ये चार स्टेप स्प्रेडशीट में करते हैं, तो डेमो बुक करें और पिछले सोमवार का ऑर्डर साथ लेकर आइए।